ताइवान के लिए आया अमेरिका और यूके

ताइवान के लिए आया अमेरिका और यूके

ताइवान के लिए आया अमेरिका और यूके

दरअसल कुछ दिनों पहले भारत और ताइवान सौदा जो करीब 7. 3 बिलीयन डॉलर इससे बौखला कर चाइना ने ताइवान पर हमला करने का और ताइवान को कबजा करने का धमकी लगातार ताइवान सरकार को देने लगा और
यहां तक कि 4 अक्टूबर 2021 को चाइना ने अपने करीब 56 लड़ाकू विमान जिनमें से चार न्यूक्लियर कैपेबिलिटी वाले लड़ाकू विमान ताइवान सीमा में घुसा दिया

 

जिसके बाद से ताइवान के लोगों के अंदर बेहद डर का माहौल बन गया

ताइवान के लोगों ने यह समझ लिया था कि चाइना आज रात को ताइवान पर हमला कर देगा और ताइवान को कब्जा लेगा

लेकिन चाइना ने उस रात को ताइवान पर कोई भी हवाई हमला नहीं किया चाइना बस शायद यह दिखाना चाहता था पूरी दुनिया को कि वह ताइवान पर कभी किसी भी वक्त हमला करके ताइवान देश को कब्जा कर सकता है

चाइना ‌के इस कारनामे के बाद ताइवान सरकार युद्ध के लिए अपनी कमर कस ली और अमेरिका यूके जापान और भारत से मदद की गुहार लगाई

ताइवान के लिए आया अमेरिका और यूके की सेना

दरअसल ताइवान को डराने के बाद चाइनीस सरकार अपने मीडिया में यह खबर वह तेजी से फैला रही थी कि ताइवान अकेला पड़ चुका है ताइवान के लिए कोई भी देश आगे नहीं आने वाला है‌ और तो और चाइनीस सरकार के एक आला

अधिकारी ने यह बयान दिया है कि ताइवान और चाइना का घरेलू मामला है इसमें कोई भी देश अपनी दखलअंदाजी ना करें क्योंकि अगर वह ऐसा करते हैं तो चाइना सीधे तौर पर उस देश से युद्ध करेगी

चाइनीस सरकार के द्वारा इस बयान के बाद अमेरिका और यूके ने अपनी सेना को ताइवान और चाइना के पास फिलीपींस सी में उतारा

फिलिपिंस सी में अमेरिका ने युद्ध अभ्यास किया यूके की सेना के साथ बताया जा रहा है कि अमेरिका ने अपना सबसे घातक जंगी बेड़ा 50 वा बेड़ा चाइना के पास तैनात कर दिया है
आपको बता दें कि अमेरिका का यह 50 वा बेड़ा दुनिया का सबसे खतरनाक जंगी बेड़ों का समूह है इनमें से कई सारे पानी के जहाज मैं न्यूक्लियर वेपंस को रखे गए हैं जो किसी भी देश को पूरी तरह से तबाह कर सकते हैं

दुनियाभर के एक्सपोर्ट सबो का का मानना है कि अगर इन देशों में से कोई भी देश हमला करता है तो तीसरा विश्वयुद्ध निश्चित तौर पर शुरू होने वाला है क्योंकि चाइना और रसिया का दोस्ती इस समय विश्व विख्यात हो चुका है दोनों देशों की दोस्ती बेहद पक्की हो चुकी है जिसके बाद से एक्सपोर्ट सबों का मानना है कि जंग के हालात में अमेरिका के खिलाफ रसिया चाइना की ओर से आ सकता है

इस बात की चिंता सभी देशों की है क्योंकि अमेरिका के 2 सबसे बड़े दुश्मन रशिया और चाइना एक साथ पहली बार अमेरिका के खिलाफ जंग लड़ेंगे जिससे बताया जा रहा है कि यह जंग काफी ज्यादा बड़ी मात्रा में तभाई लाएगा और इसका प्रभाव पूरी ही दुनिया पर पड़ने वाला है

भारतीय सरकार के तरफ से अभी ताइवान चाइना विवाद पर कोई भी ऑफिशियल संदेश नहीं आया है लेकिन ऐसा भी माना जा रहा है कि हिंदुस्तान की सेना ताइवान की तरफ से चाइना के खिलाफ जंग लड़ सकती है

भारत बहुत बड़े चक्रव्यूह में फंसा सकता है अगर भारत इस युद्ध में शामिल होता है तो क्योंकि ताइवान अमेरिका भारत के अच्छे दोस्त हैं और भारत का सबसे पुराना दोस्त रसिया है जो हर युद्ध में भारत की मदद की है जिसका एहसानमंद हमेशा से भारत रहा है लेकिन रसिया अगर चाइना की तरफ से युद्ध लड़ता है तो भारत अपने कदम पीछे ले सकता है

क्योंकि भारत और रसिया की दोस्ती बहुत ही पुरानी है और भारत के बुरे वक्त पर रसिया ने भारत का साथ दिया है जिसके कारण भारत नशे के खिलाफ युद्ध में शामिल नहीं होगा

और भी अपडेट्स जल्दी ही आएंगे… ..

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